छायांकन : www.weandwords.com
भगवान हो न तुम ?
भगवान हो न तुम ?
सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान ?
तो चलो, बना दो मुझे फिर वही
नन्ही सी चंचल गिलहरी
जो फुदक कर मूढ़े पर चढ़ जाती थी
और उछल कर किवाड़ की सांकल खोल
भर लेती थी छोटी सी मुट्ठी में अन्न
एक पुडिया खट्टे-मीठे चूरन की खातिर !
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तुम कहो तो एक खेल खेलते हैं हम दोनों
तुम कर दो मेरे मन की सी,
और बदले में मैं सिखा दूँगी तुम्हे,
आम के पेड़ पर चढ़ना,
खट्टी अमियों पर नमक डाल कर चटखारे लेना.
ट्यूबवेल वाली कोठरी की छत पर चढ़ कर
पपीते तोडना.
बराह का पानी रोकना
और उसमे छ्प-छ्प कर के कूदना.
और फिर किसी के आने की आहट सुनते ही
भाग कर छिप जाना, ईख के खेतों में.
तुम कहो तो खेलें ये खेल ?
